आसन क्या होता है ?

आसन क्या होता है?

हम आजकल बहुत ही ज्यादा एक शब्द सुन रहे हैं. योगासन, परंतु हम आसन के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं ।यदि हम जानना चाहे आसन क्या होते हैं तो हमें पता चलता है कि हमारे पुराने ऋषि मुनियों ने स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ इस प्रकार की क्रियाओं का आविष्कार किया था या खोजबीन की थी ताकि हम पूरे जीवन में अपने शरीर को कुछ विशेष प्रकार की मुद्राओं में बैठकर स्वस्थ रह सकें।

पतंजलि ने कहा है: स्थिर सुखमासनम्‌ : जिसपर देर तक बिना कष्ट के बैठा जा सके वही आसन श्रेष्ठ है।

चित्त को स्थिर रखने वाले तथा सुख देने वाले बैठने के प्रकार को हम आसन कहते हैं/

योग में यम और नियम के बाद आसन का तीसरा स्थान होता है /

आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर के मल को नाश करना है ,क्योंकी शरीर में मल या दूषित विकारों के नष्ट हो जाने से शरीर का मन में स्थिरता का आविर्भाव होता है /शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है/ अतः शरीर के स्वस्थ रहने पर मन और आत्मा में संतोष मिलता है/

जो आसन हम करते हैं उनको उन्होंने पांच प्रकार में विभाजित किया है/ अब विभाजन उन्होंने कुछ इस प्रकार से किया कि कुछ पशुओं को देख कर, कुछ वस्तुओं को देख कर ,कुछ प्रकृति से प्रेरणा लेते हुए इस प्रकार से उन्होंने सभी आसनों का विभाजन किया है /

यहां पर मैं आपको बताऊंगा के आसनों के कितने प्रकार होते हैं अथवा हो सकते है /

पशुवत आसन पशुवत आसन में वो आसन आते है जो की ऋषि मुनियों ने पशु पक्षियों के उठने -बैठने, चलने फिरने ,खाने के ढंग के आधार पर प्रेरित होकर आसनों की खोज की /इन आसनों में प्रमुख आसन होते हैं/ वृश्चिक आसन, भुजंगासन ,सिंहासन, काक आसन , मार्जरासन , तितली आसन गोमुखासन, अधोमुख श्वानासन ,भुजंगासन, मकरासन आसन ,कुक्कुटासन मत्स्यासन ,गरुण आसन इत्यादि/इन आसनों के नाम से प्रतीत हो रहा है कि अलग-अलग जानवरों को उनकी क्रियाओं के आधार पर देखते हुए बनाए गए हैं/

२ वस्तुवत आसन विभिन्न वस्तुओं के आकार को देखकर ऋषि मुनियों ने प्रेरित होते हुए इन आसनो की खोज की थी/ जिसमें प्रमुख है हलासन, धनुरासन ,चक्रासन ,वज्रासन ,सुप्त वज्रासन, नौकासन, आदि/

३ प्रकृति प्रेरित आसन इसमें वृक्ष, पेड़ ,पौधों और प्रकृति के अन्य तत्वों पर आधारित करते हुए ऋषि मुनियों ने आसनों की खोज की जैसे वृक्ष आसन, चंद्रासन ,पद्मासन, ताड़ासन, तालाब आसान, पर्वतासन इत्यादि /

4अंगों से प्ररित आसन इस प्रकार के आसनों में हम विभिन्न अंगों को हष्ट पुष्ट करने के लिए अभ्यास करते हैं / जिनमें प्रमुख हैं शीर्षासन ,पादहस्तासन ,सर्वांगासन ,कर्णपीड़ासन गर्भासन, मलासन ,स्वशासन ,हस्तपादासन /

5योगी नाम आसन इसमें वह आसन होते हैं जो कि किसी भगवान या ऋषि ,अथवा योगी के नाम पर आधारित आसन होते हैं जैसे महावीरासन, हनुमानासन ,मत्स्येंद्रासन, भैरव आसन ,ब्रह्म मुद्राआसन , सिद्धासन ,नटराजासन, अष्ट वक्रआसन , मरीची आसन ,वीरासन ,वशिष्ठासन आदि/

,कुछ और भी आसान रह जाते हैं जिनको हम इन ऊपर के विभाजन में नहीं ले पाते हैं उनमें प्रमुख हैं पश्चिमोत्तानासन सुखासन ,पद्मासन , त्रिकोणासन ,सेतुबंधासन ,कंधरासन ,बद्धकोणासन इत्यादि/

विशेष

यही सही है कि आसनसिद्धि के लिये स्वास्थ्य संबंधी कुछ नियमों का पालन आवश्यक है। जैसा श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है-

युक्ताहार बिहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य, योगो भवति दु:खहा॥

खाने, पीने, सोने, जागने सभी का नियंत्रण करना होता है।

आसन का यदि हम शाब्दिक अर्थ ले तो ये पता चलता है की जो किर्या हम आसानी से कर सके उन्हें ही आसन कहना चाहिए/ अत ये विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए की प्रत्येक आसन को बहुत ही आसानी से करना चाहिये अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है /यदि संभव हो तो प्रत्येक आसन को करने से पहले किसी योग्य प्रशिक्षक से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त करे और फिर उनके मार्गदर्शन में ही अभ्यास करे /

किसी भी आसन को करने से पहले हमें साधारण सावधानियोंको भी ध्यान में रखना चाहिए । धन्यवाद्/

मनोज मेहरा (योग और निरोग )

आप से अनुरोध है कि यदि आप ने कोई भी आसन किया तो इस से होने वाले लाभ के प्रति अपने सुझाव प्रतिक्रिया या और कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें और इस लेख को शेयर भी करें Google प्लस, Facebook, Twitter या WhatsApp पर।
धन्यवाद्/

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