हलासन को करने का सर्वोत्तम एवं आसन तरीका

हलासन जिस प्रकार नाम से प्रकट हो रहा इस आसन में हमारे शरीर की आकृति लगभग इस प्रकार की हो जाती है जैसे की हल जो की  किसान द्वारा खेत जोतने के लिए प्रयोग किया जाता है //इस आलेख में हम हलासन को करने की विधि को विस्तार पूर्वक जान् ने का प्रयास करेंगे और साथ ही साथ ये भी जानेगे की इस आसन को करने से हमारे शरीर में क्या क्या लाभ होते  है? इस आलेख के माध्यम से हम ये भी ध्यान रखना चाहेंगे  यदि कोई व्यक्ति हलासन को करना चाहता है तो उसे किन किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए /

                                     हलासन को करने की सरलतम विधि 

१ सबसे पहले कमर के बल लेट जाए.
2भुजाओं को सीधा रखें.
३ पैरो को इस प्रकार से उठाये जिस प्रकार की सर्वांगासन में उठाते है ओर हतेलिओं को हिप्स पर सपोर्ट के लिए लगते है.
४ धीरे ;धीरे सर के ऊपर से पैरो को पिछें की तरफ ले जाने का प्रयास करते है.ओर यदि संभव हो सके तो पंजो को जमीन पर लगा देते है.घुटनो को बिलकुल सीधा रखतें है
५ इस प्रकार हमारे शरीर की स्थिति हल जैसी हो जाती है.

                                                   ⇓लाभ .⇓

इस आसन को करने से हमारी रीड की हड्डी में लचीला पन आता है.
थाइरोइड ग्लैंड की सक्रियता में वृधि होती है.
सभी नाडियो में रक्त का संचार होता है.

                                                                          ⇓सावधानिया ⇓

किसी भी आसन को करने से पहले हमें साधारण सावधानियोंको भी ध्यान में रखना चाहिए 

;शारीर की सामर्थ्य के अनुसार ही ये आसन करना होता है.जोर जबरदस्ती से नुक्सान हो सकता है.

योग्य योग शिक्षक की मदद से ही इस अभ्यास को सीखना चाहिए।

                                                                                                  ये भी जाने ♂♀

                                                                                    गैस-भगाए-आराम-दिलाए-तुरंत/

                                                                                                        गैस और कब्ज से छुटकारा पाएं

                                                                                     विशेष।

; स्वांसो के साथ इस आसन को करने पर विशेष लाभ होता है,पैरो को पीछे ले जाते हुए स्वांश भर ते है. ओर वापिस सामान्य स्थिति में आतें हुए स्वांश छोड़ ते है /

        इसके अलावा आपको प्रतिदिन व्यायाम प्राणायाम जैसे कपालभांति ,अनुलोम विलोम और आसन जैसे सर्वांगासन ,हलासन , उष्ट्रासन अर्धचंद्रासन ,धनुरासन , तितलिआसन ,मंडूकआसन, पवनमुक्तासन, वज्रासन ,,गौमुखासन आदि का अभ्यास भी करते रहना चाहिए /

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आप से अनुरोध है कि यदि आप इस से होने वाले लाभ के प्रति अपने सुझाव प्रतिक्रिया या और कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें और इस लेख को शेयर भी करें Google प्लस ,Facebook ,Twitter या WhatsApp पर। धन्यवाद्
मनोज मेहरा

(योग ओर निरोग)

 

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