“रेचक क्रिया करने का सरल तरीका”

पूरे स्वशनतंत्र के अंदर से सभी  गंदगी दूर हो जाती है और हमारी स्वशनतंत्र की ताकत में वृद्धि हो जाती है  हमें स्वशनतंत्र से संबंधित, फेफड़ों से संबंधित कोई भी बीमारी जैसे कि टीवी ,फेफड़ों का कैंसर ,दमा, सांस फूलना आदि नहीं हो पाती है। यदि आप को भी रेचक क्रिया का अभ्यास करना है और इसके बारे में जानना है कि हम इस क्रिया को किस प्रकार कर पाए, इसके द्वारा हमें क्या क्या लाभ हो सकते हैं, इसको करते हुए  क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए ,तो इस पोस्ट को बहुत ध्यान से पढ़े ,अंत तक पढ़े ताकि कुछ भी आपकी समझ में आने से छूट ना जाए।

किसी भी आसन को करने से पहले हमें साधारण सावधानियों को भी ध्यान में रखना चाहिए

रेचक क्रिया करने का सरल तरीका”

1 सर्वप्रथम सुखासन पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाएंगे।

2 कमर और गर्दन बिल्कुल सीधी रखेंगे।

3 दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका को बंद करेंगे।

4 बाई नासिका से स्वास भरेंगे बाई से ही स्वांस बाहर फेकेंगे, सहजता के साथ आराम से बिना कोई जोर जबरदस्ती करे।

5  इसी प्रकार दायीं  नासिका से 5 बार स्वांस  भरेंगे ओर छोड़ेेगेे ।

अंत मे दोनों नासिकाओं से बदल-बदल कर स्वांस लेंगे और छोडेंगे10 बार। बाई नासिका बंद करेंगे दायीं से स्वांस लेंगे दाई बन्द करेंगे बाई से लेंगे।

इस प्रकार रेचक क्रिया का 1 राउंड पूरा होता हैं।अपने शरीर की सामर्थ्य के अनुसार 3,5,7,9,11 राउंड तक कर सकते हैं।

 रेचक क्रिया से होने वाले लाभ

1⇒ श्वास संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।

2⇒फेफड़ों में मजबूती आती है ।

3⇒गले के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

4⇒नाक के सभी रोगों में आराम मिलता है ।

5⇒शरीर में कार्य करने का स्टेमिना बढ़ता है।

6⇒आवाज मधुर होती है।

7⇒मस्तिष्क की कार्य क्षमता बढ़ती है।

8⇒टीवी जैसी भयानक बीमारी जल्दी सही हो जाती है।

रेचक क्रिया करते हुए सावधानियां

जिन लोगों को कोई श्वसन संबंधी समस्या है ,क्रिया करने से पहले एक बार अपने योग विशेषज्ञ से संपर्क कर लें ।जिन लोगों का पेट का ऑपरेशन हुआ है उन्हें कम से कम 90 दिन के बाद किसी योग विशेषज्ञ से परामर्श करने के पश्चात ही करनी चाहिये।।

जिन लोगों को बीपी की प्रॉब्लम है उन्हें बहुत धीरे-धीरे सावधानी के साथ करनी चाहिए ।

क्रिया करते समय जब भी दिल की धड़कन बढ़ने लगे रुक जाना चाहिए ।

कोई भी किया बहुत सहजता से सामान्य गति से करना चाहिए ।

जहां पर ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा पर हो वहीं पर इसका अभ्यास करे ,बंद कमरे में कभी नहीं करनी चाहिए। रेचक क्रिया से पहले आपका पेट बिल्कुल खाली होना चाहिए ।

रेचक क्रिया करते हुए यदि आपकी  कमर में या  गर्दन में दर्द बढ़ जाए तो कृपया तुरंत रोक देनी चाहिए।

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1 कपालभाति प्राणायाम

2अनुलोम विलोम प्राणायाम

3भ्रामरी प्राणायाम

4उद्गीत प्राणायाम ।

इसके अलावा आपको प्रतिदिन आसन जैसे सर्वांगासन ,हलासन , उष्ट्रासन अर्धचंद्रासन ,धनुरासन , तितलिआसन ,मंडूकआसन, पवनमुक्तासन, वज्रासन ,,गौमुखासन आदि का अभ्यास भी करते रहना चाहिए /

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