यात्रा करते हुए उलटी से कैसे बचें योग की सहायता से चमत्कार


प्राय हम देखेते है की कार या एयरोप्लेन में यात्रा करते हुए स्त्रियों ओर बच्चो को उलटी की शिकायत हो जाती है.ओर फिर सभी को उस यात्रा में आनंद नहीं आता है. कभी ऐसा भी होता है की जब हम लोग चक्कर दार सडको पर कार से घूम रहे होते है तब भी हमें घुमेरी आने लगती है.ओर उलटी होने को लगती है.

 

कारण↪जब हम कार से घूम रहे होते है तो हमारा कान की इनर मेम्ब्रेन दिमाग को सन्देश देना चाहती है की हम गतिमान है पर ब्रेन को लगता है की हम स्थिर है अत ये सन्देश गलफत पैदा करता है जिसके कारण एक जहरीला द्रव्य का रिसाव होता ओर व्यक्ति का जी मिचलाने लगता है.ओर उसे लगता है की उलटी आने वाली है.जिसके कारण यात्रा का सारा मजा ख़राब हो जाता है. ये तो किसी भी खोज से आज तक वेगानिक नहीं जान पाएं की किसी व्यक्ति को ऐसा महसूस होता किसी को नहीं .बच्चों में ज्यादातर ये समस्या पाई जाती है क्यों ?गर्भवती महिलायों को भी ये समस्या होती है क्यों?
निवारण ↪सफ़र करते हुए उलटी न आये या जी न मिचलाए इस की कुछ दवा भी ली जाती है परतु पूरी तरह से असरकारक नहीं होती है.कुछ घरेलु नुस्खे भी प्रचलित है जिनसे लाभ भी होता है .परतु रोकथाम संभव नहीं हो पाती है .

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सावधानियाँ↪अगर कुछ सावधानियाँबरती जायें तो कुछ हद तक इस से छुटकारा पाया जा सकता है.
1↪ सफ़र में जाने से पहले कुछ खा पी लेना चाहिए लेकिन आधे घटे पहले ओर साथ में ये भी ध्यान रखना चाहिए की हल्का फुल्का ही खाएं न की बहुत गरिस्ट भोजन.
2↪सफ़र में उस व्यक्ति को अगली सीट पर बैठना चाहिए.या पिछली सीट पर हो तो बीच में बैठना चाहिए.उल्टा हो कर तो कभी भी नहीं बैठना चाहिए,
३ ↪अगर आखें बंद कर परेशनी कम होती हो बंद कर के ही बैठे .
४ ↪ यात्रा करते समय कुछ लाइट म्यूजिक का आनद भी ले सकते है परन्तु आँख बंद कर के ही बैठे तो ये आईडिया वर्क करता है.।
5↪कुछ पुस्तक आदि भी पढ़ी जा सकती है,
6↪ खिड़की को खोल कर ताज़ी हवा में गहरे सांस लेने से भी परेशानी कम होती है.।
7↪कुछ देर गाडी को रोक कर खुले में टहल सकते हैं.।
8↪बाहर की तरफ देखतें हुए सिर्फ चलती हुई वस्तुओं पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए.।
                  विशेष ⇔      किसी भी आसन को करने से पहले हमें साधारण सावधानियों  को भी ध्यान में रखना चाहिए ।
घरेलु उपचार
१ अदरक के छोटे टुकड़े चूसते रहिएँ हर थोड़े अन्तराल के बाद.
२ कोई मीठी कैंडी चूस सकते है.
३ पिपरमेंट की गोली भी काम कर जाती है.
४लेमन या नीम्बू को चूसने से भी लाभ होता है.।
५ छोटी हरड की गोली भी चूस सकते है.इस से भी आराम मिलता है.।
६ सौंफ की फंकी भी मारने से आरामं मिलता है.।
७ काला नमक चाटने से भी रहत मिलती है.।

अंत में सबसे असरकारक तरीका

यात्रा शुरू करते हुए जैसे ही महसूस हो की जी मिचला रहा है आँखें बंद कर ले ओर अपने साँसों पर ध्यान केन्द्रित कर लम्बे ओर गहरे स्वांस लेने लगे परन्तु धीरे धीरे,उसके बाद बायीं नाक से धीरे से स्वांस ले ओर दायीं नाक से धीरे धीरे छोड़ दें.फिर दायीं नाक से धीरे से स्वांस ले ओर धीरे धीरे बायीं नाक से छोड़ दे. इस प्रकार ५ मिनट तक ये क्रिया करते रहे .ओर धीमें से अपनी आखें खोल ले.आप पायेंगे की सब कुछ आश्चर्यजनक रूप से सामान्य हो गया है.फिर यदि कुछ समय बाद कोई दिक्कत महसूस हो तो ये क्रिया दुबारा भी कर सकते है. ५ मिनट से ज्यादा भी कर सकते हैं पूरी यात्रा के दौरान कितनी ही बार कितनी ही देर तक कर सकते है, ये क्रिया इस के अलावा भी मस्तिस्क को बहुत लाभ पहुचती है. आप यात्रा के दौरान बिना किसी परेशानी के होने पर भी इस क्रिया को कर सकते है.। इस क्रिया के द्वारा आप के मस्तिस्क को शांति का अनुभव होता है.इस क्रिया से किसी को कोई भी हानि नहीं होती है.।
विशेष ⇒अब मैं आपको बताने जा रहा हूँ एक ऐसा तरीका जिसका कोई भी आधार तो नहीं है पर ये वर्क १००%करता है जितने लोगो आज तक ये आईडिया बताया गया है सभी ने बताया है की असरकारक तरीका है.क्या है ये तरीका आइये जानते है?
आकडे का नाम तो आपने सुना ही होगा इसका patta लेना होता जो की हम शिव जी को भी चडाते है.अब जब हमें किसी सफ़र पर निकलना होता है तो उस समय हम ये देखते है की हमारी नाक से स्वर कौन सी तरफ से चल रहा मानलो की बायीं तरफ का स्वर चल रहा है तो फिर हम बायीं तरफ के पैर के नीचें आकडे के पत्ते को दबा कर सॉक्स पहन लेते है .पत्ते को पंजे या एडी के निचे नहीं बल्कि तलवे के निचे रखना होता है.सुखा patta नहीं लेना होता है. ताजा हरा patta लेना होता है.बस स्वर का ध्यान रखना होगा ओर आप पाएंगे की ये तो एक चमत्कार हो गया अब खुल के बिना किसी टेंशन के सफ़र ले सकते है.
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                                                                                          मनोज मेहरा

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