भ्रामरी प्राणायाम कब , क्योँ, कैसे किया जाता है?लाभ ,हानि और सावधानियां क्या है?

 

                               भ्रामरी प्राणायाम

यदि  कोई व्यक्ति मानसिक तनाव या मानसिक  समस्या से परेशान है तो उसे  का नियमित भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।

भ्रामरी प्राणायाम   इस   प्रकार  की प्रक्रिया है जिससे कि हम अपने मस्तिष्क के अंदर कंपन कर सकते हैं उन कंपनो  के द्वारा हमारे मस्तिष्क की सभी नसों में रक्त और ऑक्सीजन का प्रभाव बहुत ही अच्छा हो जाता है और जिन व्यक्तियों में मस्तिष्क की कोई भी समस्या होती है वह दूर हो जाती है // भ्रामरी प्राणायाम भारत में पाए जाने वाले भवरे  के नाम के  ऊपर रखा गया प्राणायाम है इसको करने से व्यक्ति का मन तुरंत शांत हो जाता है यह प्राणायाम मस्तिष्क की तंत्रिकाओं  को आराम देता है और जिस प्रकार हम मस्तिष्क की मसाज कराते हैं  इस प्रकार प्राणायाम करने से हमारे मस्तिष्क की अंदर तक मसाज हो जाती है

                           भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका

सर्वप्रथम किसी भी आसन को करने से पहले हमें साधारण सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए

सर्वप्रथम शांत वातावरण में जहां पर हवा का प्रवाह अच्छा हो बैठ जाना चाहिए

उसके पश्चात अपनी आंखों को बंद कर कर पद्मासन में बैठ जाना चाहिए
अपनी कमर और गर्दन को सदैव सीधा रखना चाहिए
उसके पश्चात अपने अंगूठे से कानों को और तीन उंगलियों से आंखों को और तर्जनी उंगली से मस्तिष्क के ऊपर हल्का सा स्पर्श करते हैं
लंबा गहरा स्वांश  नाक से धीरे-धीरे छोड़ते  हैं और गुंजन  की ध्वनि उत्पन्न करते हैं
 हम नीची  धवनी  में भी आवाज  निकाल सकते हैं परंतु जितनी अधिक ऊंची आवाज निकाल सके उतना ही अधिक लाभदायक होता है जितना अधिक कंपन हमारे मस्तिष्क के अंदर तक पहुंचता है उतना ही अधिक लाभ होता है
लंबी गहरी सांस लेकर इस प्रक्रिया को३,५, 7 से 11 बार तक कर सकते हैं

                                  भ्रमरी प्रणायाम से होने वाले लाभ

(इस भ्रामरी  प्राणायाम को विडियो से भी समझ सकते है )

मस्तिष्क  को उत्तेजित होने से बचाता है यदि भ्रामरी प्राणायाम  करते हैं तो मस्तिष्क को बहुत अधिक लाभ होता है
यदि आपको किसी समय सिर में दर्द हो रहा हो तो आपके सिर दर्द को तुरंत आराम पहुंचाता है
भ्रामरी  प्राणायाम के अभ्यास से मनुष्य की बुद्धि तीक्ष्ण होती है
रक्तचााप भी   भ्रामरी प्राणायाम से सामान्य हो सकता है
भ्रामरी प्राणायाम को करने से हमारा मन शांत हो जाता है और हमारे मन में आने वाले सभी विचार ,उत्तेजना शांत हो जाती हैं
 भ्रामरी प्राणायाम को करते हुए निम्नलिखित चीजों पर ध्यान देना आवश्यक है
कभी भी कान पर अधिक दबाव ना दें
भ्रामरी प्राणायाम करते  समय चेहरे पर मुस्कुराहट का भाव होना चाहिए
भ्रामरी प्राणायाम करने से पहले किसी योग्य शिक्षक अथवा अपने चिकित्सक का परामर्श अवश्य लें

इसके साथ-साथ आप  को सर्वांगासन ,हलासन , उष्ट्रासन अर्धचंद्रासन ,धनुरासन , तितलिआसन ,मंडूकआसन गौ मुखासन आदि काअभ्यास भी करना चाहिए  ।प्राणायाम में कपालभाति और अनुलोम विलोम बहुत ही लाभदायक प्राणायाम हैं।

आप से अनुरोध है कि यदि आप ने यह आसन किया तो इस से होने वाले लाभ के प्रति अपने सुझाव प्रतिक्रिया या और कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें और इस लेख को शेयर भी करें Google प्लस Facebook Twitter या WhatsApp
धन्यवाद्                                                                                                                                                                                      मनोज मेहरा

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