प्राणायाम के बारे में कुछ विचारात्मक तथ्य।

प्राणायाम द्वारा रोगमुक्त किस तरह हुआ जा सकता है? आईये समझते हैं?
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स्वस्थ्य रहने का मंत्र -श्वासों को अपने नियंत्रण में रखने में है, परन्तु हम स्वयं श्वासों के नियंत्रण में हैं |
चिंता,क्रोध,विषय-वासना आदि के समय यदि अपनी श्वास का अवलोकन करें तो वे असामान्य मिलेंगी | इस समय यदि श्वासों को नियंत्रित कर लें तो यह उद्वेग अपने आप नियंत्रित हो जायेंगे |
ईर्ष्या, क्रोध, दुःख, शोक, चिंता आदि द्वारा असामान्य हुआ श्वसन शरीर के अन्तःस्रावी-तंत्र को असंतुलित कर देता है।
परिणामस्वरूप अतःस्रावी – तंत्र हारमोंस की कम या अधिक मात्रा अथवा हानिकारक हार्मोन स्रवित करना प्रारंभ कर देता है जिससे शरीर में विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न होने लगते हैं |
आक्सीजन
एक वयस्क व्यक्ति एक मिनट में सामान्यतः १८-२० बार श्वास लेता है | श्वास के दौरान ली गयी वायु में ऑक्सीजन मात्र २० प्रतिशत रहती है जिसमें भी हम मात्र ४ प्रतिशत ऑक्सीजन का ही उपभोग कर पाते हैं बाकी १६ प्रतिशत ऑक्सीजन,नाइट्रोजन आदि गैसों के साथ वापस आ जाती है| श्वास द्वारा खींची गई वायु फेफड़ों में १५ वर्ग फुट से अधिक का चक्कर लगाकर गंदे रक्त को शुद्ध एवं स्वच्छ कर देती है| रक्त शुद्धिकरण के दौरान उत्पन्न कचरा कार्बन डाईआक्साइड एवं अन्य विषैले तत्वों के साथ प्रश्वास के रूप में बाहर निकलता है | परन्तु उथली श्वास से यह प्रक्रिया सुचारू ढंग से नहीं हो पाती और रोगों का कारण बनती है| ऑक्सीजन के संयोग के फलस्वरूप गन्दा नीला रक्त क्षणमात्र में शुद्ध होकर लाल हो जाता है|
प्राणायाम के द्वारा प्राप्त ऑक्सीजन को रक्त शरीर कि प्रत्येक कोशिका में पहुँचाकरउन्हें जीवन प्रदान करता है | अर्थात प्रत्येक कोशिका श्वसन करती है| इसी प्रक्रिया को आक्सीकरण कहते हैं|
उथली श्वास लेने या जल्दी-जल्दी श्वास-प्रश्वास से सभी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती फलस्वरूप वहां कि कोशिकाएं निष्क्रिय होने लगती है जहाँ पर पूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती |
प्रयोगों से यह सिद्ध हो चूका है कि ऑक्सीजन को श्वास कि सही विधि से लेने पर किसी भी तरह का रोग,दर्द तो क्या ट्यूमर तक को समाप्त किया जा सकता है|
मालिस
इसके अलावा प्राणायाम द्वारा श्वास शरीर के अंदरूनी भागों की मालिस हो जाती है. जब हम श्वास फुलाकर अन्दर की तरफ दबाते हैं तो अन्दर की सारी नस-नाडी और रोम-रोम पर जोर पड़ता है और वे खुल जाती है, अन्दर का सारा मलबा और विकार नष्ट होकर खिंचाव द्वारा उन्हें जागृत किया जाता है
हार्मोनल ग्लैंड्स
प्राणायाम द्वारा श्वास शरीर के विभिन्न हार्मोनल ग्लैंड्स धीरे-धीरे एक्टिवेट हो जाते हैं. हार्मोनल ग्लैंड्स
अर्थात पेनक्रियाज (इन्सुलिन) थायरायड, वीर्य, कफ आदि जेनरेट करने वाली ग्रंथियाँ. स्वस्थ शरीर के लिए ये ग्लैंड्स अहम् भूमिका निभाते हैं
ऊर्जा
प्राणायाम द्वारा ईश्वरीय ऊर्जा का संचार होता है जो मस्तिष्क से होते हुए पूरे शरीर में व्याप्त हो जाती है और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती है
इसलिए सुबह कुछ समय प्राणायाम में अवश्य ही इन्वेस्ट करें।
प्राणायाम, अपने प्राणों को दे आयाम: https://www.youtube.com/playlist?list=PLuvYOw0Nrj2glsU8gD9tmYmM1ohjNcrD0

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