त्रिफलाचूर्ण बनाने की विधि ओर इसके लेने का तरीका ओर होने वाले लाभ.

त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि ओर इसके लाभ
त्रिफला क्या है?
ये आयुर्वेद की महान औषदी है.इसे हमारे पूर्वज सदियों से पर्योग करते आ रहे हैं.इसके निर्माण में तीन फलो का पर्योग किया जाता है.
1हर्र्र(बड़ी )इसका नाम हरीतकी भी है.terminalia इसका इंग्लिश नाम है.
2बहेरा (विभितकी)इसका इंग्लिश नाम belllirica है.
३ आवला (आमलकी )इंग्लिश नाम एम्बिलिचा ओफ्फिसिनालिस है.
बनाने की विधि ;ये बना बनाया बाजार से भी मिल जाता है परन्तु बहुत असरकारक नहीं होता है,क्योंकि बाजार में तीनो चीजो को सामान मात्र में मिश्रित कर के बनाया जाता है.लेकिन आचर्य बाघ भट्ट के अनुसार इस का मिश्रण इस प्रकार होना चाहिए की एक भाग हर्रे ,दो भाग बहेरा ओर तीन भाग आवला लेना चाहिए.

 हर्रे ;बहेरा ; आवला ;;१ ;२;३
उद्धरण के रूप में यदि हम १०० ग्राम हर्रे लेते है तो २००ग्रम बहेरा लेना होगा ओर आवले की मात्रा ३००ग्रम लेनी होगी .इस प्रकार बनया हुआ त्रिफला सर्वोत्तम होता है, तीनो वस्तुओँ के बीजो को निकाल देने के पश्चात धुप में सुखा कर महीन पीस लेने पर हमारा त्रिफला तेयार हो जाता है.
सेवन की विधि

;इसको दो प्रकार से पर्योग किया जाता है.

1 रेचक के रूप में

2 पोषक के रूप में

आइये अब जानते है कि इन दो प्रकार से लेने की विधियो में क्या अंतर है ।
१ यदि हम इसका पर्योग रेचक की तरह करना चाहते है तो रात को सोते समय १ से २ चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेते है. इस से हमारे पेट की संपूर्ण सफाई हो जाती है.सालो पुराना कब्ज भी टूट जाता है.आपने सुना भी होगा की पेट सफा तो हर रोग दफा.अत ये पट साफ़ करने के लिए सबसे अच्छा रसायन है.
२ यदि हम इसका पर्योग पोषक के रूप में करना चाहते है तो फिर इसका पर्योग प्रात काल में किया जाता है.१/४ चमच से सुरु कर के १/२ चमच तक ले सकते है. शहद या गुड़  के साथ लेना होता है. पानी के साथ सुबह के समय नहीं लेते है प्रातः काल इस प्रकार सेवन करने से हमारा शरीर मजबूत होता है।वैसे तो इसके लाभ असीमित है परन्तु मुख्या लाभ निम्न प्रकार है.
१;सबसे पहले तो ये पेट के सफाई कर्मचारी के रूप में कार्य करता है,पेट में कब्ज होने से रोकता है .।
२ आखों की रौशनी को बढ़ाता है.चश्में का नंबर धीरे -धीरे कम करके उतार देता है.
३;त्वचा को कांती प्रदान करता है .
४;लीवर की क्रिया शीलता को बढाता है
५ रक्त को शुद्ध करता है हर अंग में रक्त की उप्ल्ब्ता बड़ा ता है. .
६;रेडियोएक्टिव संक्रमण से होने वाली बिमारियों की एक मात्र दावा है.
७;बालो को असमय सफ़ेद होने से रोकता है. ओर चिर योवन प्रदान करता है।

  • विशेष>> जब हम आंवले का प्रयोग पोषक के रूप में कर रहे होते हैं तो हमे लगातार 3माह या 90 दिन से अधिक लगातार नही खाना होता हैं ।90दिन के बाद 30 दिन का अंतर कर फिर से शुरू कर सकते हैं।

अंत में ये कहा जा सकता है की ये एक मैजिकल दवा है.इसके प्रयोग से लाभ तो असीमित है परन्तु कोई ज्ञात साइड इफ़ेक्ट नहीं है. परतु फिर भी गर्भावस्था में इसका पर्योग सावधानी पूर्वक किसी आयुएर्वेद चिकस्तक के परामर्श के अनुसार ही करना चाहिए .

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मनोज मेहरा

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