तितली आसन करने का सही तरीका, लाभ और सावधानियां

                                                         तितली आसन

हमारा आज का विषय है की तितली आसन करने का सही तरीका, लाभ और सावधानियां । अत आज आपको बताया जायेगा की तितली आसन किस प्रकार किया जाता है ?

तितली आसन को करने से क्या क्या लाभ होते है?

तितली आसन को करते समय क्या क्या सावधानिया होनी चाहिए? तितली आसन में हमारी मुद्रा तितली के समान हो जाती है ।इसलिए हम इस आसन को तितली आसन कहते हैं। इस आसान को बद्धकोणासन भी कहते हैं। मोची की तरह काम करते हुए दिखने की वजह से मोची मुद्रा भी कहा जाता है. ।जो हम सारा दिन भागती दौड़ती जिंदगी में वर्क करते हैं।तो हमारे पैरों की मासपेशियों में थकावट होना एक सामान्य समस्या है।यदि हम सुबह सुबह इस आसन को कर ले। तो पैरों की मांसपेशियों की अच्छी कसरत जाती है ।मासपेशिया मजबूत हो जाती है।और फिर हम सारे दिन कितना

भी भागने दौड़ने का कार्य करें ।हमारे पैरों में थकान नहीं होती है ।

                                         तितली आसन करने का सही तरीका

1किसी समतल स्थान पर सूती चादर या चटाई बिछाकर बैठ जाए //

2 दोनों पैरों को आगे की तरफ फैला ले।उसके पश्चात दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ ले।और दोनों तलवों को आपस में मिला लें ।

3अपने दोनों हाथों से पैरों की उंगलियों को पकड़ने का प्रयास करें। परंतु ध्यान रखे कमर हमारी ना मुड़ने पाए।
4 एड़ी को शरीर के पास अधिकतम जितना भी आसानी से ला सके लाने का प्रयास करें ।
5आपके हाथ बिल्कुल सीधे रहने चाहिए।और शरीर को भी पूरी तरह से सीधा रखें।
6 ध्यान रखें रीड की हड्डी को बिल्कुल भी मुड़ने ना दे। बिल्कुल सीधी रहे ।
7सामान्य गति से सांस लेते रहें ।और दोनों पैरों के घुटनों को एक साथ ऊपर की ओर ले जायें। फिर नीचे ले जाएं ।
8 दुबारा ऊपर ले जायेऔर नीचे लाये।
9 जिस प्रकार की तितली के पर हिलते हैं।ऐसा करते हुए घुटनों को फर्श पर स्पर्श करने का प्रत्यन करें ।
10 इस प्रकार आप अपने पैरों को लगभग 25 से 50 बार तक ऊपर नीचे ,ऊपर नीचे कर सकते हैं ।
11 धीरे-धीरे जितना संभव हो उतनी ही गति से प्रक्रिया दोहराते रहे।और धीरे धीऱे गति को बढाने का प्रयत्न करे।

12जानू के अंदरुनी हिस्से में खिंचाव को महसूस करे ।और लंबी गहरी सांस लेते रहें।
13 ध्यान रखें कि झटका ना लगे।
14 क्रिया पूरी सावधानी से चलती रहे।आराम से चलती रहे ।
15 उसके पश्चात पैरों को सीधा कर लें ।और अपने शरीर को ढीला छोड़ सामान्य हो जाये
तितली आसन से होने वाले लाभ
1 गर्भावस्था में तितली आसन करने से डिलीवरी के समय होने वाले दर्द का एहसास बहुत कम हो जाता है ।गर्भवती महिलाओं को यह आसन पहली तिमाही में शुरु कर देना चाहिए ।इस आसन से उनके शरीर के अगले निचले हिस्से की जगहों के आंतरिक हिस्से का तनाव कम होकर खुल जाता है।
घुटनों में लचीलापन बढ़ जाता है।
2 इस योग को करने से हमारा शरीर लचीला बनता है ।
3इस योग को करने से हमारे शरीर को कोई भी हानि नहीं होती है।
4 बहुत से लोगों के घुटनों में दर्द होता है और जकड़न होती है। इससे जकड़न और घुटनों के दर्द में आराम मिलता है ।
5कुछ लोग अधिक देर तक बैठने के बाद घुटने सीधे नहीं कर पाते हैं। तो तितली आसन करने से उनकी समस्या भी दूर हो जाती है ।
6पूरे पैरों में ,घुटनों में खून का दौरान बहुत अच्छा हो जाता है।
7सभी नसों को ऑक्सीजन अच्छी तरह से मिलने लगती है ।
8घटिया में, जोड़ों के दर्द में इस आसन को करने से काफी लाभ होता है ।
                                सावधानियां
1किसी भी आसन को करते समय विधि का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है/
। अतः जिस प्रकार से आसन बताया गया है ।
ध्यान पूर्वक उसी प्रकार से करना है अन्यथा तो हानि होने की संभावना है ।
2जिन लोगों के कमर के निचले हिस्से में दर्द हो वह तितली आसन करने का प्रयत्न न करे।
3पैरों को ज्यादा ज्यादा जोर से न झटके।झटका आने पर नस पर नस चढ़ने का खतरा हो सकता है।
4साइटिका के मरीजों को यह आसन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए ।
इस आसन से मानसिक लाभ भी होते हैं परंतु यह अत्यंत आवश्यक है ।
आप किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में ही इस आसन को करने की कोशिश करें ।
अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है।

 

आप से अनुरोध है कि यदि आप इस से होने वाले लाभ के प्रति अपने सुझाव प्रतिक्रिया या और कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें और इस लेख को शेयर भी करें Google प्लस ,Facebook ,Twitter या WhatsApp पर। धन्यवाद्
मनोज मेहरा

(योग ओर निरोग)

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