चतुरंगदण्डासन(FOUR LIMBED STAFF POSE)

चतुरंग दण्डासन,⇒चार शब्दों के मिलाप से बना हुआ है जिसमे चतुर अर्थात चार, अंग अर्थात शरीर का हिस्सा और दंड अर्थात डंडा तथा आसन है। यदि आपको बहुत ज्यादा ताकत की आवश्यकता है तो आप इस आसन को कर सकते हैं।आपको अपने भुज दण्ड बनाने की आवश्यकता है तो आपको इस आसन को अवश्य करना चाहिए।यदि आप को अपनी रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाना है तो फिर आपको इस आसन को अवश्य करना चाहिए/

आसन को FOUR LIMBED STAFF POSE और लो प्लैंक भी कहा जाता है।

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चतुरंग दण्डासन को प्रत्येक उम्र के व्यक्ति कर सकते है परन्तु 12वर्ष से कम औऱ 58 वर्ष से अधिक आयु होने पर किसी योग्य योग शिक्षक से परामर्श लेना चाहिए।अपने शरीर की क्षमता के  आधार पर ही इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।चतुरंग दंडासन हमारे शरीर को शक्ति और स्फूर्ति देता है।

किसी भी आसन को करने से पहले हमें साधारण सावधानियों  को भी ध्यान में रखना चाहिए ।

         तो चलिए आज हम विस्तार से जानते है Chaturanga Dandasana के बारे में|
Chaturanga Dandasana:

पेट दर्द को ठीक करता हैं और कंधों को मजबूती देता हैं।
सुबह के समय जल्दी उठकर योग का अभ्यास करना सबसे अच्छा है लेकिन, अगर आपके पास अन्य काम हैं, तो आप शाम को भी इसे कर सकते हैं। बस अपने भोजन और अपने अभ्यास के बीच में कम से कम 4 घंटे का अंतर होना ही चाहिए।
चतुरंग दण्डासन को करने की सरलतम विधि 
सबसे पहले पेट के बल लेट जाएँ।
अपने दोनों हाथों की हथेलियों और पैरों की उँगलियों पर अपने शरीर के पूरे वजन को व्यवस्थित कर दें।
हांथो को आगे लाकर छाती के दोनो ओर लाये। फिर कंधो का सहारा लेते हुए थोड़ा सा जमीन पर टिकने का प्रयासः करे।
इसके पश्चात कोहनियों पर वजन डालते हुए ऊपर उठे। साथ ही पैरो की भी उँगलियों के सहारे से शरीर का पिछला भाग भी ऊपर उठा ले।
ध्यान दे कि आपके फोर आर्म और अपर आर्म के मध्य 90 डिग्री का कोण बने।
ध्यान रहे की पीठ सीधी होनी चाहिए और सारा वजन हांथो और कंधो पर नहीं होना चाहिए।
सर को शरीर की सिधाई में रखे और दृष्टि सदैव सामने होनी चाहिए।

इस आसन में आप 30 से 60 सेकंड तक रुक सकते है। फिर धीरे धीरे समय बढ़ा सकते है।

प्रतिदिन3,5 से लेकर 7,11 बार तक इसका अभ्यास कर सकते हैं।
                                                                                   चतुरंग दण्डासन के फायदे
चतुरंग दण्डासन बाज़ुओं और कलाईयों को शक्ति प्रदान करता है। यह आपकी कलाई को अधिक मजबूत और अधिक लचीला बनाता हैI
चतुरंग दण्डासनको नियमित करने से मन शांत रहता है।
प्रतिदिन इस आसन को करने से कंधो को मजबूती मिलती है।
यह आसन पेट को कम करता है|
यह आसन पीठ की हड्डी को मजबूत कर देता है।
यह आसन हांथो के संतुलन के लिए बहुत ही लाभदायक होता है।
चतुरंग दण्डासन से पेट एकदम फिट लगता है।
चतुरंग दण्डासन के साथ निम्न आसनो का अभ्यास भी करना चाहिए।
भुजंगासन
उर्ध्व मुख श्वानासन
अधो मुख श्वानासन
उष्ट्रासन
अर्धचंद्रासन
                                                                                    चतुरंग दण्डासन मे सावधानी
यदि आप गर्भवती है तो यह आसान न करे।
यदि आपकी कलाइयों में या फिर कमर में दर्द है तो इस आसन को न करे|
अगर आप किसी बीमारी से ग्रस्त है तो भी इस आसन को करने से बचे|ओर अभ्यास करने से पहले किसी योग्य योग शिक्षक से यदि परामर्श कर ले तो बहुत लाभदायक सिद्ध होता है।

इसके अलावा आपको प्रतिदिन प्राणायाम  जैसे कपालभांति ,अनुलोम विलोम ,   भ्रामरी प्राणायाम   , उद्गीत प्राणायाम आसन जैसे सर्वांगासन ,हलासन , उष्ट्रासन अर्धचंद्रासन ,धनुरासन , तितलिआसन ,मंडूकआसन, पवनमुक्तासन, वज्रासन ,,गौमुखासन आदि का अभ्यास भी करते रहना चाहिए /

आप से अनुरोध है कि यदि आप ने यह आसन किया तो इस से होने वाले लाभ के प्रति अपने सुझाव, प्रतिक्रिया या और कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें और इस लेख को शेयर भी करें Google प्लस ,Facebook ,Twitter या WhatsApp पर।
धन्यवाद्/

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