गैस और कब्ज से छुटकारा पाएं

आपको पेट में गैस बनती है। आपके पेट में कब्ज रहती है तो आपको पवनमुक्तासन का अभ्यास नित्य करना चाहिए.। पवन मुक्तासन जिस को अंग्रेजी में हम GAS REALEASE AASAN भी कहते हैं। यह अपने नाम के अनुसार बहुत ही लाभकारी आसन है। पवन का अर्थ होता है हवा अर्थात हमारे पेट में जो अतिरिक्त गैस या हवा इकठा हो जाती है और पेट में दर्द करती है उसको हम इस आसन के अभ्यास से आसानी से निकाल सकते हैं।

पवनमुक्तासन की विधि

इस आसन से होने वाले लाभ और इसको करते हुए सावधानियों के बारे में नीचे पूरी डिटेल में समझाया गया है

पवन मुक्त आसन को करने की विधि

सर्वप्रथम किसी भी आसन को करने से पहले हमें साधारण सावधानियोंकोध्यान में रखना चाहिए
सबसे पहले जमीन पर हम कमर के बल लेट जाते हैं बाएं पैर को घुटने से मोड कर अपनी छाती पर रखते हैं।
दोनों हाथों की उंगलियों को एक दूसरे में इंटर लॉक करते हुए घुटने को पकड़कर पेट को दबाने का प्रयास करते हैं। जब यह क्रिया करते हैं तो स्वास को बिल्कुल बाहर छोड़ देते हैं। उसके पश्चात अपने सिर को गर्दन से उठाते हुए नासिका को स्पर्श करने का प्रयास करते हैं। जब तक हमारा स्वांश बाहर रुका रहे तब तक हम इसी स्थिति में रुकते है। उसके पश्चात धीरे धीरे सांस लेते हुए अपने पैर को वापस सीधा कर देते हैं ।यह क्रिया २ से 5 बार तक करनी चाहिए उसके पश्चात दूसरे पैर से भी 5 बार करेंगे ।अंत में हम दोनों पैरों के साथ इस क्रिया का अभ्यास करेंगे दोनों पैरों के साथ पकड़ ले ।बाद हम कमर की मालिश भी कर सकते हैं अर्थात कमर को आगे पीछे छोड़ कर उपर नीचे भी हो सकते हैं फिर दाएं बाएं भी रुड़क सकते हैं इससे हमारी पूरी कमर की अच्छे ढंग से मालिश हो जाती है ।

पवनमुक्तासन से होने वाले लाभ

जिन लोगों को गैस की समस्या होती है जिनके पेट में गैस बनती है उन व्यक्तियों के लिए बहुत ही लाभदायक आसन है ।
इस आसन को करने से पेट के सभी अंगो जैसे कि पेनक्रियाज और लीवर आदि की एक्टिविटी बहुत अच्छी हो जातीहै।
इस क्रिया को करने से पाचन प्रणाली बहुत मजबूत हो जाती है।
हमारे पेट में फूलने और गैस बनने की समस्या से हमें राहत मिलती है ।
पेट और कमर की सभी मांसपेशियां मजबूत हो जाती है ।
महिलाओं में मासिक की कोई भी समस्या हो यह उसमें भी लाभदायक है।
हृदय रोग एसिडिटी और कमर दर्द से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है ।
पेट की बढ़ी हुई चर्बी और उससे होने वाली परेशानियों को उससे होने वाली समस्याओं को यह कम करता है ।

हाथ पैर पीठ कमर आदि के साथ साथ मेरुदंड को भी ये आसन बहुत मजबूती देता है।

पवनमुक्तासन करते हुए रखे जाने वाली समय सावधानियां

यदि आपकी कमर में दर्द है या गर्दन में दर्द है तो सिर को उठाकर नासिका को घुटने से स्पष्ट करने का प्रयास ना करें केवल पैरों को दबाना ही पर्याप्त होता है /
यदि आपको कोई उच्च रक्तचाप, स्लिप डिस्क और गर्दन अथवा पीठ आदी में कोई समस्या हो या पेट में दर्द रहता हो या पेट का ऑपरेशन हुआ हो तो यह अपने डॉक्टर की सलाह ले कर ही करें।

विशेष ( खाना खाने के बाद कोई भी आसान कभी भी नहीं करना चाहिए।बस एक मात्र वज्रासन को खाना खाने के बाद कर सकते है /)

इसके साथ-साथ आप को सर्वांगासन ,हलासन , उष्ट्रासन अर्धचंद्रासन ,धनुरासन , तितलिआसन ,मंडूकआसन गौ मुखासन आदि काअभ्यास भी करना चाहिए ।प्राणायाम में कपालभाति और अनुलोम विलोम बहुत ही लाभदायक प्राणायाम हैं।

आप से अनुरोध है कि यदि आप ने यह आसन किया तो इस से होने वाले लाभ के प्रति अपने सुझाव प्रतिक्रिया या और कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें और इस लेख को शेयर भी करें Google प्लस ,Facebook Twitter ,WhatsApp पर।

धन्यवाद् मनोज मेहरा

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