कपालभांति से क्या हो सकते है लाभ ?

कपालभांति प्राणायाम आज जो हम प्राणायाम करते उन सब में सबसे ज्यादा किया जाने वाला प्राणायाम है ,सबसे ज्यादा प्रचलित प्राणायाम है /सबसे ज्यादा प्रचलित क्योँ है यदि ये जान ने का प्रयास करे तो हमे ये जान ना पड़ेगा की⇒⇓

कपालभांति को करते किस प्रकार है ?

कपालभांति क्या है ?

कपालभांति को करने की विधि क्या है ?

किसी भी आसन को शुरू करने से पहले कुछ साधारण सावधानियों का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक होता है /

जब हमारे उपरोक्त प्रश्नों का उचित उत्तर हमे प्राप्त हो जाए तो उसके बाद हमे ये जान ने का प्रयास करना पड़ेगा की ⇒⇓

कपालभांति को करते हुए क्या क्या सावधानियों का हमे ध्यान रखना होगा ?

ताकि हमे किसी प्रकार का नुक्सान न उठाना पड़े./

अब जब हमे ये ज्ञात हो गया की कपाल भांति को करने की विधि क्या है? और इसको करते हुए क्या क्या सावधानियां करनी होगी? तो उसके बाद हम ये जान ने का प्रयास करेंगे की कपालभांति से हमे क्या क्या लाभ होते है? उसके बाद ही हम सभी निष्कर्षो को मिलाकर ये जान पाएंगे की कपालभांति सर्वाधिक प्रचलित व्यायाम  क्योँ  है ,तो आएये इस आलेख में हम ये जान ने का प्रयास करते है की कपालभांति से क्या क्या लाभ होते है ?

कपालभाति प्रणायाम की मदद से आप अपने शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकाल सकते हैं।

  • ये लिवर और किडनी को बेहतर काम करने के लायक बनाता है।
  • इस प्रणायाम को करने से थकान दूर होती है और शरीर में ताजगी आती है।
  • ये आंखों के नीचे के काले घेरों को भी साफ कर देता है।

कपालभाति प्रणायाम से रक्त परिसंचरण ठीक होता है।

  • शरीर में उपापचय अच्छा होता है।
  • आपका दिमाग अच्छी तरह काम करता है।
  • इस प्रणायाम से फेफड़ों की कार्यक्षमता भी बढ़ती है।
  • नियमित अभ्यास से स्मरण शक्ति तेज होती है।
  • कपालभाति लगभग सभी बिमारियों को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।
  • कपालभाति को नियमित रूप से करने पर वजन घटता है और मोटापा में बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
  • इसके अभ्यास से त्वचा में निखार आ जाता है।
  • यह आपके बालों के लिए बहुत अच्छा है।
  • यह क्रिया अस्थमा के रोगियों के लिए एक तरह से रामबाण है। इसके नियमित अभ्यास से अस्थमा को दूर किया जा सकता है।
  • कपालभाति से श्वसन मार्ग के अवरोध दूर होते हैं तथा एवं बलगम की अधिकता दूर होती है।
  • यह शीत, राइनिटिस (नाक की श्लेष्मा झिल्ली का सूजना), साइनसाइटिस तथा श्वास नली के संक्रमण के उपचार में उपयोगी है।
  • यह उदर में तंत्रिकाओं को सक्रिय करती है,पेट के आंतरिक अंगों की मालिश करता है तथा पाचन क्रिया को सुधारता है।
  • मस्तिष्क में यह विशेष प्रकार की जागरुकता उत्पन्न करता है।
  • आंखों की रोशनी को बढ़ाता है।
  • यह कुंडलिनीशक्ति को जागृत करने में  भी सहायक  सिद्ध हो सकता  है।
  • यह कब्ज की शिकायत को दूर करने के लिए बहुत लाभप्रद प्राणायाम है.।
  • नाड़ियों का शुद्धिकरण कर ,नाडियो की कार्य शमता बढाने का कार्य करता है /
  • अग्नाशय की मासपेशियों को सक्रिय करता है जो कि मधुमेह के रोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है।
  • रक्त परिसंचरण को ठीक करता है
  • चेहरे पर चमक  को बढ़ाता और आप सदा युवा और जवान लगते है।
  • पाचन क्रिया को अच्छा करता है और पोषक तत्वों का शरीर में संचरण करता है।
  • आपकी पेट कि कि चर्बी अपने-आप काम हो जाती है।
  • मस्तिष्क और तांत्रिक तंत्र को अत्यधिक सक्रिय करता है ।
  • मन को शांत एवम शीतलता प्रदान करता है।

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    1 कपालभाति प्राणायाम

    2अनुलोम विलोम प्राणायाम

    3भ्रामरी प्राणायाम

    4उद्गीत प्राणायाम ।

    इसके अलावा आपको प्रतिदिन आसन जैसे सर्वांगासन ,हलासन , उष्ट्रासन अर्धचंद्रासन ,धनुरासन , तितलिआसन ,मंडूकआसन, पवनमुक्तासन, वज्रासन ,,गौमुखासन आदि का अभ्यास भी करते रहना चाहिए /

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