कपालभांति क्या है ?

  1. आजकल हम सब सुनते आ रहे की योग करो पर क्या क्या करे ?ये तो समझ में आता नहीं कोई कहता है की प्राणायाम करो ,कोई कहता है की आसन करो ,आदि आदि पर हमारा सिरदर्द हो जाता है और सर दर्द तब और बढ़ जाता जब हमने सोचा की प्राणायाम करते है तो फिर कहा जाता है की कोन सा कपाल भांति ,अनुलोम विलोम और या फिर कोई और ,,,,,,,,,,,,,,,,,,यदि आपके साथ भी ऐसी कोई समस्या आ रही है तो चलो इसका समाधान तलाश करने की कोशिश करते है समझने का प्रयास करते है की कोनसा प्राणायाम किस प्रकार करते है ,,,,,,,,,,,,,इस आलेख में जान ने का प्रयास करते है की कपाल भांति किस प्रकार किया जाता है ?

⇒ कपालभांति को करने की संसार की सबसे आसान विधि ⇐

कपालभाती प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठकर सांसों को बाहर छोड़ने की क्रिया करें।

सांसों को बाहर छोड़ते या फेंकते समय पेट को अंदर की तरफ धक्का देना है। ध्यान रखें कि सांस लेना नहीं है क्योंकि उक्त क्रिया में सांस अपने आप ही अंदर चली जाती है।

इसको इस प्रकार से समझ सकते है की हमसे कहा जाय की नाक से स्वांश को फेककर मोमबत्ती को भुझाएं /

कपालभाती प्राणायाम करते समय मूल आधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करना होता है। इससे मूल आधार चक्र जाग्रत होकर कुं‍डलिनी शक्ति जागृत होने में मदद मिलती है। कपालभाती प्राणायाम करते समय ऐसा सोचना है कि हमारे शरीर के सारे नकारात्‍मक तत्व शरीर से बाहर जा रहे हैं।

प्रतिदिन कम से कम १५ मि कपालभांति प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए /किसी विशेष बिमारी जैसे कैंसर ,एड्स और अन्य किसी भी बड़ी और भयानक बिमारी में ३० मि से लेकर ६० मि तक भी इसका अभ्यास कराया जा सकता है /

प्रारम्भ में इसका अभ्यास इस नियम से करना चाहिए /
१ प्रथम सप्ताह →५मि *६ राउंड
२ दितीय सप्ताह →१०मि *३ राउंड
३तृतीय सप्ताह →१५ मि *२राउंड
४ चतुर्थ सप्ताह →३० मि *१राउंड

इसके पश्चात बिना किसी भी दिन छुट्टी किये रोज पूरे वर्ष ओर पूरे जीवन प्रतिदिन इसका अभ्यास करते रहना चाहिए।ताकि पूरे जीवन मे कोई भी रोग आपके पास न आ सके।

कपाल भांति प्राणायाम को करने में किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए /
ये भी बहुत आवश्यक है लिंक पर क्लिक करके देखना चाहिए की इसमें हमारी क्या आवश्यकता हो सकती है / ⇒ ⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒⇒

गैस-भगाए-आराम-दिलाए-तुरंत/

नाक की बढ़ी हुई हड्डी से छुटकारा पाए बिना ऑपरेशन के /

1 कपालभाति प्राणायाम

2अनुलोम विलोम प्राणायाम

3भ्रामरी प्राणायाम

4उद्गीत प्राणायाम ।

इसके अलावा आपको प्रतिदिन आसन जैसे सर्वांगासन ,हलासन , उष्ट्रासन अर्धचंद्रासन ,धनुरासन , तितलिआसन ,मंडूकआसन, पवनमुक्तासन, वज्रासन ,,गौमुखासन आदि का अभ्यास भी करते रहना चाहिए /

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